“सेवा ही सच्ची पूजा है।” यह वाक्य श्री ठाकुर बाबा (भोमिया जी) मंदिर में चरितार्थ होता है। यहाँ हर भक्त सेवा को ईश्वर की आराधना मानता है। मंदिर में प्रतिदिन भक्ति, आरती, और प्रसाद वितरण के साथ-साथ सेवा भावना का अनोखा उदाहरण देखने को मिलता है।
मंदिर समिति और भक्त मिलकर हर शनिवार को भोजन वितरण, भंडारा, और स्वच्छता अभियान करते हैं। भक्त अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, धन, वस्त्र या समय का दान करते हैं।
यहाँ का एक प्रमुख आयोजन “सवामणी सेवा” है, जिसमें हजारों लोग एक साथ भोजन ग्रहण करते हैं। भक्तों का मानना है कि सवामणी में सहयोग देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
इसके अलावा, मंदिर में आए प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत प्रेमपूर्वक किया जाता है। यह सेवा मंदिर की आत्मा है, जो सभी को जोड़ती है। ठाकुर बाबा के चबूतरे पर बैठकर जब भक्त आरती करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं ईश्वर उनके भीतर झांक रहे हों।
भक्तों के अनुसार, ठाकुर बाबा की विशेष कृपा उन पर होती है जो निस्वार्थ सेवा और सच्ची आस्था से मंदिर कार्यों में भाग लेते हैं। चाहे वह दीपदान हो, सफाई हो, या भोजन बनाना — हर कार्य पूजा के समान माना जाता है।
यही कारण है कि मंदिर आज केवल पूजा का नहीं, बल्कि समर्पण और करुणा का प्रतीक बन गया है।