भारत की धरती पर हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि जीवंत आस्था के प्रतीक बन जाते हैं। ऐसा ही एक पवित्र स्थान है — श्री ठाकुर बाबा (भोमिया जी) का मंदिर। लगभग 300 वर्ष पुराना यह मंदिर केवल इतिहास नहीं, बल्कि भक्ति और चमत्कारों की गाथा कहता है।
प्राचीन समय में इस स्थान पर ठाकुरजी (भगवान कृष्ण) और महादेवजी का मंदिर स्थित था। करीब 150 वर्ष पूर्व जब मौसमी नदी में आई भयंकर बाढ़ ने पूरा क्षेत्र जलमग्न कर दिया, तब यह मंदिर ढह गया। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि केवल भोमिया जी का चबूतरा ही सुरक्षित बचा रहा — मानो स्वयं ठाकुर बाबा ने अपने भक्तों की रक्षा हेतु यह चमत्कार किया हो।
भक्तों ने इस दिव्य संकेत को स्वीकारते हुए मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और तब से यह स्थल आस्था का केंद्र बन गया। हर शनिवार यहाँ 400–500 श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के दिनों में तो यह स्थान पूरी तरह भक्तिमय वातावरण से भर जाता है। महानवमी पर लगने वाला मेला गाँव ही नहीं, आसपास के कई जिलों के लोगों को आकर्षित करता है।
इस मंदिर का एक और विशेष पहलू है — यहाँ प्रेतबाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए भी लोग आते हैं। ठाकुर बाबा की कृपा से अनेक भक्तों ने अपने जीवन में शांति और सुख का अनुभव किया है।
वर्षभर में लगभग 20–25 सवामणी कार्यक्रम होते हैं, जिनमें हजारों भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। साथ ही, 40 से अधिक बार सामूहिक भोजन का आयोजन भी किया जाता है।
यह स्थान न केवल पूजा का केंद्र है, बल्कि सेवा और सामूहिकता की भावना का सजीव उदाहरण है।